Administrative structure of Rajasthan [Useful Exam Facts Updated] | rasnotes.com

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राजस्थान का प्रशासनिक ढांचा एवं शासन व्यवस्था

 राजस्थान में वर्तमान में 7 संभाग व 33 जिले है।
(क) जयपुर संभाग:- 1. जयपुर 2. अलवर  3. दौसा 4. झुंझनू 5. सीकर।
(ख) भरतपुर संभाग:- 1. भरतपुर 2. धौलपुर 3. करौली 4. सवाईमाधोपुर।
(ग) कोटा संभाग:- 1. कोटा 2. बूंदी 3. झालावाड़ 4. बारां।
(घ) अजमेर संभाग:- 1. अजमेर 2. टोंक 3. नागौर 4.भीलवाड़ा
(ड) उदयपुर संभाग:- 1. उदयपुर 2. चितौड़गढ़ 3. राजसंमद 4. डूगरपुर 5. बांसवाड़ा 6. प्रतापगढ़।
(च) जोधपुर संभाग:-1. जोधपुर 2. जैसलमेर 3. बाड़मेर 4. जालौर 5. पाली 6. सिरोही।
(छ) बीकानेर संभाग:- 1. बीकानेर 2. श्रीगंगानगर 3. हनुमानगढ़ 4. चूरू।

 राजस्व प्रशासन के अन्तर्गत राज्य में कुल 294 उपखण्ड, 338 तहसील व 181 उपतहसील है।

 नगरीय विकास विभाग के अन्तर्गत राज्य में 3 विकास प्राधिकरण- जयपुर, अजमेर व जौधपुर है व 15 यूआईटी है।



 10 नगर निगम:- सभी सातों संभाग में तथा जयपुर, जौधपुर व कोटा में एक नया निगम बनाया गया है। इस प्रकार जयपुर, जोधपुर, कोटा में 2-2 नगर निगम है।

 स्थानीय विकास विभाग के अन्तर्गत राज्य में कुल 196 नगरीय निकाय है जिसमें 10 नगर निगम, 34 नगर परिषद व 152 नगरपालिकाएं है।

 राज्य में पंचायती राज त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत 33 जिला परिषद्, 352 पंचायत समितियाॅ व 11341 ग्राम पंचायते है। इनमें से 57 नई पंचायत समितियों व 1456 ग्राम पंचायतो का गठन वर्ष 2019 में किया गया था।

 बजट 2020 में मण्ड़वरी (दौसा), बस्सी (जयपुर), रामगढ़ (अलवर), बानसुर (अलवर), जायल (नागौर), भोपालगढ़ (जोधपुर), सीकरी (भरतपुर), सरमथुरा, बसेडी (धौलपुर), अटरू (बांरा), पावटा (जयपुर), सुलतानपुर (कोटा), सपोदरा (करौली), लक्ष्मणगढ (अलवर), जावाल (सिरोही), बामनवास (सवाईमाधोपुर), लालगढ़ जाटान (श्रीगंगानगर), उच्चैन (भरतपुर) में नई नगरपालिकाए गठित करने की घोषणा की है। (कुल18)

 संयुक्त राजस्थान में पंचायत राज अध्यादेश 1948 पारित कर लागू किया गया.

 राजस्थान सरकार ने 73वें संविधान संशोधन विधयेक को आधार बनाते हुए प्रदेश में राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 पारित किया, जो 23 अप्रेल 1994 से लागू हो गया.

 जिला का प्रमुख जिला कलेक्टर होता है। वह राजस्व मामलों में और जिले की कानून—व्यवस्था को सुचारू बनाये रखने में मजिस्ट्रेट की भूमिका का निर्वाह भी करता है। 

 जिलों को उपखण्ड में बांटा गया है। उपखण्ड का प्रशासनिक प्रमुख उपखण्ड अधिकारी होता है। जिन जिम्मेदारियों का निर्वहन जिला कलेक्टर जिला स्तर पर करता है, उन्हीं जिम्मेदारियों का निर्वहन उपखण्ड अधिकारी उपखण्ड स्तर पर करता है।



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