Geography of Rajasthan Notes on Mines and minerals of Rajasthan Part-2

Geography of Rajasthan Notes on Mines and minerals of Rajasthan Part-2

राजस्थान की खनिज सम्पदा भाग-2

राजस्थान के खनिज संसाधन के नोट्स की इस श्रृंखला के पहले हिस्से में धात्विक खनिजों से जुड़े तथ्य दिये गये. आने वाले हिस्सों में राजस्थान में अधात्विक खनिजों और पेट्रोलियम संसाधनों से जुड़े तथ्य दिये जायेंगे। इस श्रृंखला के दूसरे हिस्से में आपको अधात्विक खनिज के परीक्षापयोगी तथ्य दिये जा रहे हैं।
अधात्विक खनिज को अयस्क से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा परिष्कृत कर प्राप्त नहीं किया जाता है। ये प्राकृतिक रूप में ही उपयोग में लिये जाते हैं। 
 

संगमरमर

संगमरमर उत्पादन में राजस्थान का लगभग एकाधिकार है। मकराना का संगमरमर पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। 
आगरा का किला, ताजमहल और विक्टोरिया पैलेस मकराना के मार्बल से ही निर्मित हैं। 
उदयपुर में हरे, जैसलमेर में पीला, मकराना में सफेद, भैंसलाना में काला, जालोर और बांसवाड़ा में गुलाबी और पाली में सतरंगा मार्बल मिलता है। 
राजस्थान में संगमरमर के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र नागौर में मकराना, राजसमंद, उदयपुर और अजमेर का किषनगढ़ है। 
 

जिप्सम

प्राकृतिक अवस्था में जिप्सम सेलेनाइट के रूप्य में मिलता है। 
राजस्थान भारत का सबसे बड़ा जिप्सम उत्पादक है। देश के जिप्सम का 82 प्रतिशत भंडार यहीं पर है और आज देश का 99 प्रतिशत जिप्सम यहीं से निकाला जाता है। 
जिप्सम का सर्वाधिक उपयोग उर्वरक बनाने में किया जाता है। साथ ही प्लास्टर आफ पेरिस, सीमेंट, रंगरोगन आदि बनाने में भी इसका उपयोग होता है। 
बीकानेर के जामसर में जिप्सम का सबसे बड़ा जमाव क्षेत्र है। 
 

राजस्थान में जिप्सम उत्पादक क्षेत्र

1.नागौरः गोठ-मांगलोद, भदवासी, मंगोल
2.बीकानेरः जामसर, लूणकरणसर
3.चूरूः तारानगर
4.जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्रः मोहनगढ़, हमीरवाली
5.पाली-जोधपुर क्षेत्रः फलसूण्ड, मांगलोद
 

एस्बेस्टाॅस

एस्बेस्टाॅस का उपयोग सीमेंट की चद्दरें, टाइले और दूसरी ताप निरोधक वस्तुयें बनाने में किया जाता है।
यह प्राकृतिक अवस्था में क्राइसोलाइट और एम्फीबाल के रूप में पाया जाता है। 
राजस्थान देश का सबसे बड़ा एस्बेस्टाॅस उत्पादक है। यह देश का कुल 90 प्रतिशत उत्पादन करता है। 
 

राजस्थान में एस्बेस्टाॅस उत्पादक क्षेत्र 

उदयपुर में झाड़ोल, बरोली, जांजर की पाल, रिषभदेव, धलाना-ओडवास तथा डूंगरपुर, राजसमंद और पाली में इसका उत्पादन होता है। 
 

फेल्सपार

व्यापारिक फेल्सपार पोटाश स्पर और सोडा स्पर का मिश्रण है। 
राजस्थान देश के कुल उत्पादन का लगभग 61 प्रतिशत का उत्पादन करता है।
इस खनिज की प्राप्ति अभ्रक खदानों से सह उत्पाद के रूप में होती है। 
अजमेर के मकरेरा में राजस्थान के कुल उत्पादन का 96 प्रतिशत उत्पादन होता है। 
भीलवाड़ा, राजसमंद, पाली में भी इसका उत्पादन होता है। 
 

लाइमस्टोन

इसका प्रमुख उपयोग पोर्टलैण्ड सीमेंट के रूप में होता है। 
सवाईमाधोपुर, लाखेरी, उदयपुर, ब्यावर, चित्तौड़गढ़ वाया निम्बाहेड़ा मे स्थापित सीमेंट कारखानों में इसका उपयोग हो रहा है। 
सीमेंट ग्रेड लाइमस्टोन का उत्पादन चित्तौड़गढ़, नागौर, जैसलमेर में हो रहा है। 
सीमेंट के अलावा लाइमस्टोन का प्रयोग लोहा एवं स्टील में भी किया जाता है।
स्टीलग्रेड लाइमस्टोन या एसएमएस ग्रेड के प्रमुख भण्डार जैसलमेर के सम, खुंयाला, सानू, खियांखिंवसर, राता, मण्डा क्षेत्र में मिले हैं। 
 

कांच बालूका या सिलिकासैण्ड

उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान कांच बालूका या सिलिका सैण्ड का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। 

राजस्थान में सिलिकासैण्ड उत्पादक क्षेत्र

1.बूंदीः बारोदिया
2.जयपुरः झर, सामोद
3.सवाईमाधोपुरः ऐलनपुर
4.बारांः हनुमन्तखेड़ा, कुंदी
5.बीकानेरः मूढ़, गुढ़ा
 

चीनी मिट्टी

चीनी मिट्टी का उपयोग सिरेमिक उद्योग में प्रमुखता से होता है।
सीकर जिले के बूचारा, टोरडा, उदयपुर के समीप खाराबारिया, पाली के खराड़िया, लीथरिया और बीकानेर में इसके भण्डार पाये जाते हैं। 
 
 
काम के नोट्स:

राजस्थान का भुगोल: महत्वपूर्ण तथ्य

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